6 महीने से न्याय की आस… आखिरकार CRIBT की पहल से मिली उम्मीद
सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही और लापरवाही के कारण अक्सर जरूरतमंदों को अपने ही हक के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। लेकिन जब समाज के सजग प्रहरी आगे आते हैं, तो न्याय की उम्मीद फिर से जाग उठती है। क्राइम रिसर्च इंटेलिजेंट ब्यूरो ट्रस्ट (CRIBT) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनहित सर्वोपरि है। क्या है पूरा मामला? जनपद हापुड़ की एक बेसहारा विधवा महिला पिछले लगभग 6 महीनों से सरकार द्वारा स्वीकृत ₹30,000 की सहायता राशि पाने के लिए विभागीय अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रही थी। हर बार उसे सिर्फ खोखले आश्वासन दिए गए, लेकिन भुगतान की कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। CRIBT का कड़ा एक्शन जैसे ही इस गंभीर मामले की जानकारी क्राइम रिसर्च इंटेलिजेंट ब्यूरो ट्रस्ट (CRIBT) को मिली, संगठन की टीम तुरंत हरकत में आई। जिला उपाध्यक्ष दुर्गेश तोमर एवं उनकी सक्रिय टीम सीधे संबंधित विभाग के कार्यालय पहुँची। अधिकारियों के साथ तथ्यात्मक और सख्त बातचीत की गई तथा इतने लंबे समय से लंबित प्रकरण पर स्पष्ट जवाब मांगा गया। टीम ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 3 दिनों के भीतर सहायता राशि लाभ...